Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.199.118: भीष्म कहते हैं, "हे राजन! जप करने वालों को मन्त्र का फल किस प्रकार प्राप्त होता है? यह मैंने तुम्हें बताया है। जप करने वाले ब्राह्मण ने कौन-सी गति प्राप्त की? उसे कौन-सा स्थान प्राप्त हुआ? उसे कौन-से लोक सुलभ हुए? और यह सब कैसे संभव हुआ? ये बातें आगे बताई जाएँगी।" 118. | mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जापकानां फलावाप्तिर्मया ते सम्प्रदर्शिता।
गति: स्थानं च लोकाश्च जापकेन यथा जिता:॥ ११८॥
अनुवाद
भीष्म कहते हैं, "हे राजन! जप करने वालों को मन्त्र का फल किस प्रकार प्राप्त होता है? यह मैंने तुम्हें बताया है। जप करने वाले ब्राह्मण ने कौन-सी गति प्राप्त की? उसे कौन-सा स्थान प्राप्त हुआ? उसे कौन-से लोक सुलभ हुए? और यह सब कैसे संभव हुआ? ये बातें आगे बताई जाएँगी।" 118.
Bhishma says, "O King! How do those who chant receive the fruit of the mantra? I have shown you this. What state did the Brahmin who chanted attain? Which place did he occupy? Which worlds became accessible to him? And how was all this possible? These things will be told later. 118.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥