Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.199.116-117: मेरे इस साथी के पास न तो कुछ है और न ही इसका मुझ पर कोई ऋण है। हमने यह खेल तुम्हारी परीक्षा लेने के लिए खेला है। काल, धर्म, मृत्यु, काम, क्रोध और तुम दोनों - इन सबकी तुम्हारे सामने एक-दूसरे के विरुद्ध परीक्षा हो चुकी है। अब तुम जहाँ चाहो, अपने कर्मों के अनुसार उन लोकों में जाओ। | mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मेरे इस साथी के पास न तो कुछ है और न ही इसका मुझ पर कोई ऋण है। हमने यह खेल तुम्हारी परीक्षा लेने के लिए खेला है। काल, धर्म, मृत्यु, काम, क्रोध और तुम दोनों - इन सबकी तुम्हारे सामने एक-दूसरे के विरुद्ध परीक्षा हो चुकी है। अब तुम जहाँ चाहो, अपने कर्मों के अनुसार उन लोकों में जाओ।
This companion of mine does not hold anything and neither does he owe anything to me. We played this game to test you. Time, Dharma, death, lust, anger and you both – all of them have been tested against each other in front of you. Now go to those worlds wherever you wish, living by your own karma.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥