Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.199.115: विरूपा ने कहा- हे राजन! आपको यह जान लेना चाहिए कि हम दोनों ही काम और क्रोध हैं। हमने ही आपको इस कार्य में लगाया है। आपने जिस प्रकार एक साथ फल भोगने की बात कही है, उसी प्रकार आपको और इस ब्राह्मण को एक ही लोक की प्राप्ति होगी ॥115॥ | mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विरूप उवाच
कामक्रोधौ विद्धि नौ त्वमावाभ्यां कारितो भवान्।
सहेति च यदुक्तं ते समा लोकास्तवास्य च॥ ११५॥
अनुवाद
विरूपा ने कहा- हे राजन! आपको यह जान लेना चाहिए कि हम दोनों ही काम और क्रोध हैं। हमने ही आपको इस कार्य में लगाया है। आपने जिस प्रकार एक साथ फल भोगने की बात कही है, उसी प्रकार आपको और इस ब्राह्मण को एक ही लोक की प्राप्ति होगी ॥115॥
Virupa said- O King! You should know that we both are Kaam and Krodh. We have engaged you in this task. As you have spoken about enjoying the fruits together, you and this Brahmin will get the same world. ॥ 115॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥