Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.199.110: ब्राह्मण बोला, "हे राजन! जो वस्तु आपने मांगी थी और जिसे देने का मैंने वचन दिया था, उसे मैं आपकी जमानत के रूप में अपने पास रख रहा हूँ; अतः आप उसे शीघ्र ले लीजिए। यदि आप उसे नहीं लेंगे, तो मैं अवश्य ही आपको शाप दे दूँगा।" | mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्राह्मण उवाच
गृहाण धारयेऽहं च याचितं संश्रुतं मया।
न चेद् ग्रहीष्यसे राजन् शपिष्ये त्वां न संशय:॥ ११०॥
अनुवाद
ब्राह्मण बोला, "हे राजन! जो वस्तु आपने मांगी थी और जिसे देने का मैंने वचन दिया था, उसे मैं आपकी जमानत के रूप में अपने पास रख रहा हूँ; अतः आप उसे शीघ्र ले लीजिए। यदि आप उसे नहीं लेंगे, तो मैं अवश्य ही आपको शाप दे दूँगा।"
The Brahmin said, "O King! The thing which you had asked for and which I had promised to give, I am keeping it with me as your deposit; therefore, take it soon. If you do not take it, then I will surely curse you. 110.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥