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mahabharat 12.199.108: इसके बाद राजा इक्ष्वाकु ने उनसे कहा, 'तुम दोनों अपना विवाद सुलझ जाने पर ही यहाँ से प्रस्थान करो । इस समय मेरे पास आकर अपना कार्य पूरा किए बिना मत जाओ । मुझे भय है कि कहीं राजा का कर्तव्य कलंकित या मिथ्या न हो जाए ॥108॥   |   mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन  »  श्लोक 108
 
 
श्लोक  12.199.108 
तौ चोवाच स राजर्षि: कृतकार्यौ गमिष्यथ:।
नेदानीं मामिहासाद्य राजधर्मो भवेन्मृषा॥ १०८॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद राजा इक्ष्वाकु ने उनसे कहा, 'तुम दोनों अपना विवाद सुलझ जाने पर ही यहाँ से प्रस्थान करो । इस समय मेरे पास आकर अपना कार्य पूरा किए बिना मत जाओ । मुझे भय है कि कहीं राजा का कर्तव्य कलंकित या मिथ्या न हो जाए ॥108॥
 
After this, King Ikshwaku said to them, 'You both should leave from here only after your dispute is settled. Do not go without completing your work by coming to me at this time. I am afraid that the king's duty may be tarnished or false.॥ 108॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)