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mahabharat 12.199.105: इतने में ही ब्राह्मण जापक बोला - राजन! आपने दोनों के बीच की बातचीत सुन ली है। मैंने आपको जो वचन दिया था, उसके अनुसार आप बिना किसी संकोच के मेरा दान स्वीकार करें।   |   mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन  »  श्लोक 105
 
 
श्लोक  12.199.105 
ब्राह्मण उवाच
श्रुतमेतत्त्वया राजन्ननयो: कथितं द्वयो:।
प्रतिज्ञातं मया यत्ते तद् गृहाणाविचारितम्॥ १०५॥
 
 
अनुवाद
इतने में ही ब्राह्मण जापक बोला - राजन! आपने दोनों के बीच की बातचीत सुन ली है। मैंने आपको जो वचन दिया था, उसके अनुसार आप बिना किसी संकोच के मेरा दान स्वीकार करें।
 
Meanwhile, the Brahmin Jaapak spoke up - King! You have heard the conversation between the two. As per the promise I made to you, please accept my donation without any hesitation. 105.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)