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mahabharat 12.199.103: विरूप ने कहा - विकृत ! यदि तुम मेरी दी हुई वस्तु स्वीकार नहीं करोगे तो यह धर्मात्मा राजा तुम्हें कारागार में डाल देगा ॥103॥   |   mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन  »  श्लोक 103
 
 
श्लोक  12.199.103 
विरूप उवाच
दीयमानं यदि मया नेषिष्यसि कथञ्चन।
नियंस्यति त्वां नृपतिरयं धर्मानुशासक:॥ १०३॥
 
 
अनुवाद
विरूप ने कहा - विकृत ! यदि तुम मेरी दी हुई वस्तु स्वीकार नहीं करोगे तो यह धर्मात्मा राजा तुम्हें कारागार में डाल देगा ॥103॥
 
Virupa said - Vikrit! If you do not accept what I offer, then this righteous king will imprison you. ॥103॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)