Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.199.100: विचित्र ने कहा- राजन् ! विचित्र ने अभी आपसे कहा है कि मुझ पर ऋण है; परन्तु उस समय मैंने वह वस्तु उसे दान कहकर दे दी थी; अतः अब उस पर मेरा कोई ऋण नहीं है। अब वह जहाँ चाहे वहाँ जा सकता है ॥100॥ | mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विकृत उवाच
धारयामीत्यनेनोक्तं ददानीति तथा मया।
नायं मे धारयत्यद्य गच्छतां यत्र वाञ्छति॥ १००॥
अनुवाद
विचित्र ने कहा- राजन् ! विचित्र ने अभी आपसे कहा है कि मुझ पर ऋण है; परन्तु उस समय मैंने वह वस्तु उसे दान कहकर दे दी थी; अतः अब उस पर मेरा कोई ऋण नहीं है। अब वह जहाँ चाहे वहाँ जा सकता है ॥100॥
Vikrutik said- King! Virutik has just told you that I carry debt; but at that time I had given that thing to him by calling it a donation; hence I do not have any debt on him. Now he can go wherever he wants.॥ 100॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥