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mahabharat 12.199.10: देवी! आज मेरा बड़ा सौभाग्य है कि आप प्रसन्न होकर मेरे समक्ष प्रकट हुईं। यदि आप सचमुच मुझ पर प्रसन्न हैं, तो कृपा करके मुझे आशीर्वाद दीजिए, जिससे मेरा मन जप में लगा रहे।'॥10॥   |   mahabharat अध्याय 12.199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 199: जापकको सावित्रीका वरदान, उसके पास धर्म, यम और काल आदिका आगमन,राजा इक्ष्वाकु और जापक ब्राह्मणका संवाद, सत्यकी महिमा तथा जापककी परम गतिका वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.199.10 
दिष्टॺा देवि प्रसन्ना त्वं दर्शनं चागता मम।
यदि चापि प्रसन्नासि जप्ये मे रमतां मन:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
देवी! आज मेरा बड़ा सौभाग्य है कि आप प्रसन्न होकर मेरे समक्ष प्रकट हुईं। यदि आप सचमुच मुझ पर प्रसन्न हैं, तो कृपा करके मुझे आशीर्वाद दीजिए, जिससे मेरा मन जप में लगा रहे।'॥10॥
 
‘Goddess! Today I am very fortunate that you were pleased and appeared before me. If you are really pleased with me, then please bless me so that my mind remains focused on chanting.'॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)