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mahabharat 12.198.3-4: ये स्थान, जो परम बुद्धिमान देवताओं के कहे गए हैं, अनेक रूप और रंग वाले हैं। फल भी नाना प्रकार के हैं। वहाँ दिव्य विमान और दिव्य सभाएँ हैं, जहाँ देवता अपनी इच्छानुसार विचरण करते हैं। राजन! वहाँ नाना प्रकार के क्रीड़ास्थल और स्वर्ण कमलों से सुशोभित कुएँ हैं। 3-4॥   |   mahabharat अध्याय 12.198: परमधामके अधिकारी जापकके लिये देवलोक भी नरक-तुल्य हैं—इसका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 198: परमधामके अधिकारी जापकके लिये देवलोक भी नरक-तुल्य हैं—इसका प्रतिपादन  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  12.198.3-4 
अमूनि यानि स्थानानि देवानां परमात्मनाम्।
नानासंस्थानवर्णानि नानारूपफलानि च॥ ३॥
दिव्यानि कामचारीणि विमानानि सभास्तथा।
आक्रीडा विविधा राजन् पद्मिन्यश्चैव काञ्चना:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
ये स्थान, जो परम बुद्धिमान देवताओं के कहे गए हैं, अनेक रूप और रंग वाले हैं। फल भी नाना प्रकार के हैं। वहाँ दिव्य विमान और दिव्य सभाएँ हैं, जहाँ देवता अपनी इच्छानुसार विचरण करते हैं। राजन! वहाँ नाना प्रकार के क्रीड़ास्थल और स्वर्ण कमलों से सुशोभित कुएँ हैं। 3-4॥
 
These places which are said to be the most intelligent gods, have many forms and colours. Fruits are also of different types. There are divine planes and divine meetings where the gods move as per their wish. Rajan! They have various types of playgrounds and wells decorated with golden lotuses. 3-4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)