Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.197.7: यदि जप करने वाले साधक को अणिमा आदि शक्तियाँ प्राप्त हो जाएँ और वह उनमें आसक्त हो जाए, तो वह उसके लिए नरक है और वह उससे मुक्त नहीं हो सकता। | mahabharat अध्याय 12.197: जापकमें दोष आनेके कारण उसे नरककी प्राप्ति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अथैश्वर्यप्रवृत्तेषु जापकस्तत्र रज्यते।
स एव निरयस्तस्य नासौ तस्मात् प्रमुच्यते॥ ७॥
अनुवाद
यदि जप करने वाले साधक को अणिमा आदि शक्तियाँ प्राप्त हो जाएँ और वह उनमें आसक्त हो जाए, तो वह उसके लिए नरक है और वह उससे मुक्त नहीं हो सकता।
If a practitioner of Japa (chanting) gets the powers like Anima etc. and gets attached to them, then that itself is hell for him and he cannot get rid of it.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥