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mahabharat 12.197.5: जो लोग जप के कारण अपनी श्रेष्ठता का अभिमान करते हैं, वे सभी नरक में जाते हैं। जो व्यक्ति दूसरों का अपमान करता है, वह भी नरक में जाता है ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 12.197: जापकमें दोष आनेके कारण उसे नरककी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 197: जापकमें दोष आनेके कारण उसे नरककी प्राप्ति  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.197.5 
अहङ्कारकृतश्चैव सर्वे निरयगामिन:।
परावमानी पुरुषो भविता निरयोपग:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
जो लोग जप के कारण अपनी श्रेष्ठता का अभिमान करते हैं, वे सभी नरक में जाते हैं। जो व्यक्ति दूसरों का अपमान करता है, वह भी नरक में जाता है ॥5॥
 
All those who feel proud of their superiority due to chanting go to hell. A person who insults others also goes to hell. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)