Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.197.11: जो मनुष्य 'मैं जप का अनुष्ठान अवश्य पूर्ण करूँगा' ऐसा दृढ़ निश्चय करके जप आरम्भ करता है, परन्तु न तो उसमें ठीक से लग पाता है और न उसे पूरा कर पाता है, वह नरक में गिरता है ॥11॥ | mahabharat अध्याय 12.197: जापकमें दोष आनेके कारण उसे नरककी प्राप्ति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दृढग्राही करोमीति जाप्यं जपति जापक:।
न सम्पूर्णो न संयुक्तो निरयं सोऽनुगच्छति॥ ११॥
अनुवाद
जो मनुष्य 'मैं जप का अनुष्ठान अवश्य पूर्ण करूँगा' ऐसा दृढ़ निश्चय करके जप आरम्भ करता है, परन्तु न तो उसमें ठीक से लग पाता है और न उसे पूरा कर पाता है, वह नरक में गिरता है ॥11॥
A person who begins to chant with the firm resolve, "I will certainly complete the ritual of chanting," but neither engages in it properly nor is able to complete it, falls into hell. ॥ 11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥