श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 197: जापकमें दोष आनेके कारण उसे नरककी प्राप्ति  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.197.1 
युधिष्ठिर उवाच
गतीनामुत्तमा प्राप्ति: कथितां जापकेष्विह।
एकैवैषा गतिस्तेषामुत यान्त्यपरामपि॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा- पितामह! आपने बताया कि जप करने वालों को सभी सिद्धियों में श्रेष्ठ सिद्धि प्राप्त होती है। क्या यही उनकी एकमात्र सिद्धि है? अथवा उन्हें कोई अन्य सिद्धि भी प्राप्त होती है?॥1॥
 
Yudhishthira asked- Grandfather! Here you have told that the best among all the attainments is attained by the practitioners of Japa. Is this the only attainment for them? Or do they attain any other attainment also?॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)