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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 196: जपयज्ञके विषयमें युधिष्ठिरका प्रश्न, उसके उत्तरमें जप और ध्यानकी महिमा और उसका फल  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.196.2 
श्रुतास्त्वत्त: कथाश्चैव धर्मयुक्ता महामते।
संदेहोऽस्ति तु कश्चिन्मे तद् भवान् वक्तुमर्हति॥ २॥
 
 
अनुवाद
महाराज, मैंने आपके मुख से अनेक धार्मिक कथाएं सुनी हैं; फिर भी मेरे मन में एक शंका है, कृपया उसे बताएं।
 
Sir, I have heard many religious stories from your mouth; yet there is one doubt in my mind, please tell me about it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)