Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.195.9: मन नाना विषयों में भटकता रहता है। इसका कोई स्थायी आधार नहीं है। पाँचों इन्द्रियाँ इसके द्वार हैं जिनसे होकर यह इधर-उधर घूमता है और अत्यंत चंचल है। धैर्यवान योगी को चाहिए कि वह पहले ध्यान द्वारा ऐसे मन को अपने हृदय में एकाग्र करे। | mahabharat अध्याय 12.195: ध्यानयोगका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मन नाना विषयों में भटकता रहता है। इसका कोई स्थायी आधार नहीं है। पाँचों इन्द्रियाँ इसके द्वार हैं जिनसे होकर यह इधर-उधर घूमता है और अत्यंत चंचल है। धैर्यवान योगी को चाहिए कि वह पहले ध्यान द्वारा ऐसे मन को अपने हृदय में एकाग्र करे।
The mind wanders in various subjects. It has no permanent support. The five senses are the doors through which it moves here and there and it is extremely fickle. A patient Yogi should first concentrate such a mind in his heart through meditation.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥