Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.195.22: उस ध्यान से उत्पन्न सुख को प्राप्त करके योगी उस ध्यान में अधिकाधिक तल्लीन हो जाता है। इस प्रकार योगीजन दुःख और शोक से रहित निर्वाण (मोक्ष) पद को प्राप्त करते हैं॥ 22॥ | mahabharat अध्याय 12.195: ध्यानयोगका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उस ध्यान से उत्पन्न सुख को प्राप्त करके योगी उस ध्यान में अधिकाधिक तल्लीन हो जाता है। इस प्रकार योगीजन दुःख और शोक से रहित निर्वाण (मोक्ष) पद को प्राप्त करते हैं॥ 22॥
Having attained the happiness generated by that meditation, the Yogi becomes more and more engrossed in that meditation. In this way, the Yogis attain the state of Nirvana (salvation) which is free from sorrow and grief.॥ 22॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि ध्यानयोगकथने पञ्चनवत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १९५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें ध्यानयोगका वर्णनविषयक एक सौ पञ्चानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १९५॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥