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mahabharat 12.194.58: जिन्होंने अपने मन को वश में नहीं किया है, वे अपनी कठिन इन्द्रियों द्वारा, जो भिन्न-भिन्न विषयों की ओर लगी रहती हैं, आत्मा का साक्षात्कार नहीं कर सकते ॥ 58॥   |   mahabharat अध्याय 12.194: अध्यात्मज्ञानका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 194: अध्यात्मज्ञानका निरूपण  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  12.194.58 
न चात्मा शक्यते द्रष्टुमिन्द्रियैश्च विभागश:।
तत्र तत्र विसृष्टैश्च दुर्वार्यैश्चाकृतात्मभि:॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
जिन्होंने अपने मन को वश में नहीं किया है, वे अपनी कठिन इन्द्रियों द्वारा, जो भिन्न-भिन्न विषयों की ओर लगी रहती हैं, आत्मा का साक्षात्कार नहीं कर सकते ॥ 58॥
 
Those who have not controlled their minds cannot realize the Self through their difficult senses which are directed towards different objects. ॥ 58॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)