श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 194: अध्यात्मज्ञानका निरूपण  »  श्लोक 55-56
 
 
श्लोक  12.194.55-56 
एवं ये विदुराध्यात्मं केवलं ज्ञानमुत्तमम्॥ ५५॥
एतां बुद्‍ध्वा नर: सर्वां भूतानामागतिं गतिम्।
अवेक्ष्य च शनैर्बुद्धॺा लभते शमनं तत:॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य अपनी बुद्धि से धीरे-धीरे जीवों की इस गति का चिन्तन करता है और उस शुद्ध एवं उत्कृष्ट आध्यात्मिक ज्ञान को प्राप्त करता है, वह परम शांति को प्राप्त होता है ॥55-56॥
 
The person who gradually contemplates on this movement of living beings with his intellect and attains that pure and excellent spiritual knowledge, attains ultimate peace. 55-56॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)