श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 194: अध्यात्मज्ञानका निरूपण  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  12.194.52 
इतीमं हृदयग्रन्थिं बुद्धिभेदमयं दृढम्।
विमुच्य सुखमासीत न शोचेच्छिन्नसंशय:॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
बुद्धि द्वारा रचित रहस्य हृदय की सबसे दृढ़ गाँठ है। उसे खोलकर बुद्धिमान पुरुष निःसंदेह सुखपूर्वक रहता है और कभी शोक नहीं करता ॥ 52॥
 
The mystery created by the intellect is the strongest knot in the heart. Unravelling it, a wise man without any doubts lives happily and never grieves. ॥ 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)