श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 194: अध्यात्मज्ञानका निरूपण  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  12.194.33 
अथ यन्मोहसंयुक्तमव्यक्तविषयं भवेत्।
अप्रतर्क्यमविज्ञेयं तमस्तदुपधारयेत्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
जब मन में किसी प्रकार की आसक्ति उत्पन्न हो और किसी भी इन्द्रिय का विषय स्पष्ट रूप से समझ में न आए, उसके विषय में कोई तर्क काम न करे और वह किसी प्रकार समझ में न आए, तब यह निश्चय कर लेना चाहिए कि तमोगुण बढ़ गया है ॥33॥
 
When any feeling of attachment arises in the mind and the object of any sense is not clearly understood, no logic works about it and it is not understood in any way, then it should be decided that the Tamoguna has increased. ॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)