श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 194: अध्यात्मज्ञानका निरूपण  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.194.3 
भीष्म उवाच
अध्यात्ममिति मां पार्थ यदेतदनुपृच्छसि।
तद् व्याख्यास्यामि ते तात श्रेयस्करतमं सुखम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी बोले - तात! कुन्तीनन्दन! तुम जिस अध्यात्मज्ञान के विषय में पूछ रहे हो, उसे मैं तुम्हें समझाता हूँ; वे परम कल्याण और सुखस्वरूप हैं॥3॥
 
Bhishmaji said – Tat! Kuntinandan! Let me explain for you the spiritual knowledge you are asking about; He is the embodiment of ultimate welfare and happiness. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)