श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 194: अध्यात्मज्ञानका निरूपण  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  12.194.29-30h 
सत्त्वं रजस्तमश्चैव प्राणिनां संश्रिता: सदा।
त्रिविधा वेदना चैव सर्वसत्त्वेषु दृश्यते॥ २९॥
सात्त्विकी राजसी चैव तामसी चेति भारत।
 
 
अनुवाद
भारत! सत्व, रज और तम - ये तीन गुण जीवों में सदैव विद्यमान रहते हैं और इन्हीं के कारण उन सभी जीवों में तीन प्रकार के अनुभव देखे जाते हैं - सात्विकी, राजसी और तामसी ॥29 1/2॥
 
Bharat! Sattva, Raja and Tamas - these three qualities are always present in living beings and due to these three types of experiences are seen in all those living beings - Sattviki, Rajasiki and Tamasi. ॥ 29 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)