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mahabharat 12.194.26: उस समय रजोगुण से युक्त बुद्धि समस्त इन्द्रियों को अपने-अपने कार्यों में लगाती है। तत्पश्चात् विषयों के सम्बन्ध में प्रेमरूपी सत्त्वगुण प्रकट होता है। तत्पश्चात् मनुष्य के आसक्ति आदि विकारों के कारण मद की भावना उत्पन्न होती है। 26॥   |   mahabharat अध्याय 12.194: अध्यात्मज्ञानका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 194: अध्यात्मज्ञानका निरूपण  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  12.194.26 
इन्द्रियाणि हि सर्वाणि प्रवर्तयति सा तदा।
तत: सत्त्वं तमोभाव: प्रीतियोगात् प्रवर्तते॥ २६॥
 
 
अनुवाद
उस समय रजोगुण से युक्त बुद्धि समस्त इन्द्रियों को अपने-अपने कार्यों में लगाती है। तत्पश्चात् विषयों के सम्बन्ध में प्रेमरूपी सत्त्वगुण प्रकट होता है। तत्पश्चात् मनुष्य के आसक्ति आदि विकारों के कारण मद की भावना उत्पन्न होती है। 26॥
 
At that time the intellect imbued with Rajogun engages all the senses in its activities. Subsequently, the Sattva Guna of love appears in relation to objects. After that, due to the vices like attachment etc. of the man, the feeling of intoxication arises. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)