Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.193.33: धर्म ही मनुष्यों का भाग्य है। वही स्वर्ग में देवताओं का अमृत है। धार्मिक व्यक्ति अपने धर्म के कारण ही मृत्यु के बाद भी सदैव सुख भोगता है। 33॥ | mahabharat अध्याय 12.193: शिष्टाचारका फलसहित वर्णन, पापको छिपानेसे हानि और धर्मकी प्रशंसा । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धर्म ही मनुष्यों का भाग्य है। वही स्वर्ग में देवताओं का अमृत है। धार्मिक व्यक्ति अपने धर्म के कारण ही मृत्यु के बाद भी सदैव सुख भोगता है। 33॥
Religion is the destiny of human beings. That is the nectar of the gods in heaven. A religious person always enjoys happiness after death because of his religion. 33॥
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि भीष्मयुधिष्ठिर संवादे आचारविधौ त्रिनवत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १९३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें भीष्म-युधिष्ठिरसंवादके प्रसंगमें आचारविधिविषयक एक सौ तिरानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १९३॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥