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mahabharat 12.193.31: बुद्धिमान पुरुष कहते हैं कि मन से किया गया धर्म सब प्राणियों के लिए उत्तम है; इसलिए मन में सब प्राणियों के कल्याण का चिन्तन करते रहना चाहिए ॥31॥   |   mahabharat अध्याय 12.193: शिष्टाचारका फलसहित वर्णन, पापको छिपानेसे हानि और धर्मकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 193: शिष्टाचारका फलसहित वर्णन, पापको छिपानेसे हानि और धर्मकी प्रशंसा  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  12.193.31 
मानसं सर्वभूतानां धर्ममाहुर्मनीषिण:।
तस्मात् सर्वेषु भूतेषु मनसा शिवमाचरेत्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान पुरुष कहते हैं कि मन से किया गया धर्म सब प्राणियों के लिए उत्तम है; इसलिए मन में सब प्राणियों के कल्याण का चिन्तन करते रहना चाहिए ॥31॥
 
Wise men say that the religion done through the mind is the best for all creatures; therefore one should keep thinking about the welfare of all living beings in the mind. ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)