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mahabharat 12.193.26: पापियों का हृदय, उनकी आँखों और चेहरे की विकृति उनके पापों को प्रकट कर देती है। जो लोग महापुरुषों से जान-बूझकर अपने पाप छिपाते हैं, वे गिर जाते हैं। 26.   |   mahabharat अध्याय 12.193: शिष्टाचारका फलसहित वर्णन, पापको छिपानेसे हानि और धर्मकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.193.26 
हृदयं पापवृत्तानां पापमाख्याति वैकृतम्।
ज्ञानपूर्वं विनश्यन्ति गूहमाना महाजने॥ २६॥
 
 
अनुवाद
पापियों का हृदय, उनकी आँखों और चेहरे की विकृति उनके पापों को प्रकट कर देती है। जो लोग महापुरुषों से जान-बूझकर अपने पाप छिपाते हैं, वे गिर जाते हैं। 26.
 
The heart of the sinners and the deformity of their eyes and face reveal their sins. Those who deliberately hide their sins from great men, fall. 26.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)