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mahabharat 12.193.21-22h: मनुष्य को प्रातः और सायं दोनों समय विधिपूर्वक ब्राह्मणों की पूजा (सेवा) करनी चाहिए। यह व्यापार में श्रेष्ठतम व्यापार के समान है और कृषि में श्रेष्ठ खेती के समान फलदायी है। जो मनुष्य ब्राह्मणों की पूजा करता है, उसे विविध फसलें प्राप्त होती हैं और उसे उत्तम वाहन गौ प्राप्त होता है।   |   mahabharat अध्याय 12.193: शिष्टाचारका फलसहित वर्णन, पापको छिपानेसे हानि और धर्मकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 193: शिष्टाचारका फलसहित वर्णन, पापको छिपानेसे हानि और धर्मकी प्रशंसा  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  12.193.21-22h 
सायं प्रातश्च विप्राणां पूजनं च यथाविधि।
पण्यानां शोभते पण्यं कृषीणां बाद्यते कृषि:॥ २१॥
बहुकारं च सस्यानां वाह्ये वाहो गवां तथा।
 
 
अनुवाद
मनुष्य को प्रातः और सायं दोनों समय विधिपूर्वक ब्राह्मणों की पूजा (सेवा) करनी चाहिए। यह व्यापार में श्रेष्ठतम व्यापार के समान है और कृषि में श्रेष्ठ खेती के समान फलदायी है। जो मनुष्य ब्राह्मणों की पूजा करता है, उसे विविध फसलें प्राप्त होती हैं और उसे उत्तम वाहन गौ प्राप्त होता है।
 
One should worship (serve) Brahmins in a proper manner both in the morning and evening. This is like the best business in business and is as fruitful as the best farming in agriculture. A person who worships Brahmins grows various crops and gets the best vehicles of the cow species.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)