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mahabharat 12.193.17: धर्मानुसार, उसे उगते हुए सूर्य को नहीं देखना चाहिए, दूसरे की नग्न पत्नी पर दृष्टि नहीं डालनी चाहिए तथा अपनी पत्नी के मासिक धर्म के समय उसके साथ एकांत स्थान में संभोग करना चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 12.193: शिष्टाचारका फलसहित वर्णन, पापको छिपानेसे हानि और धर्मकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 193: शिष्टाचारका फलसहित वर्णन, पापको छिपानेसे हानि और धर्मकी प्रशंसा  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.193.17 
नेक्षेतादित्यमुद्यन्तं न च नग्नां परस्त्रियम्।
मैथुनं सततं धर्म्यं गुह्ये चैव समाचरेत्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
धर्मानुसार, उसे उगते हुए सूर्य को नहीं देखना चाहिए, दूसरे की नग्न पत्नी पर दृष्टि नहीं डालनी चाहिए तथा अपनी पत्नी के मासिक धर्म के समय उसके साथ एकांत स्थान में संभोग करना चाहिए।
 
He should not look at the rising sun, should not cast his eyes on another's naked wife and should always have intercourse with his own wife in a secluded place during her menstrual period, as per the Dharma. 17.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)