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होमकाले तथा जुह्वन्नृतुकाले तथा व्रजन्।
अनन्यस्त्रीजन: प्राज्ञो ब्रह्मचारी तथा भवेत्॥ ११॥
अनुवाद
जो प्रतिदिन होम के समय हवन करता है, मासिक धर्म के समय अपनी पत्नी के पास जाता है और पराई स्त्री पर दृष्टि नहीं डालता, वह बुद्धिमान पुरुष ब्रह्मचारी के समान माना जाता है ॥11॥
He who performs havans every day at the time of homa, visits his wife during her menstrual period and never casts his eyes on another's wife, that wise man is considered to be equal to a celibate. ॥11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥