Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.190.6: इस संदर्भ में कहा गया है - संसार शारीरिक और मानसिक दुःखों से भरा है। इस संसार के सुख भी अंत में दुःख की ओर ले जाते हैं। ऐसा दृष्टिकोण रखने वाले विद्वान पुरुष कभी मोह में नहीं पड़ते ॥6॥ | mahabharat अध्याय 12.190: सत्यकी महिमा, असत्यके दोष तथा लोक और परलोकके सुख-दु:खका विवेचन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अत्रोच्यते—
शारीरैर्मानसैर्दु:खै: सुखैश्चाप्यसुखोदयै:।
लोकसृष्टिं प्रपश्यन्तो न मुह्यन्ति विचक्षणा:॥ ६॥
अनुवाद
इस संदर्भ में कहा गया है - संसार शारीरिक और मानसिक दुःखों से भरा है। इस संसार के सुख भी अंत में दुःख की ओर ले जाते हैं। ऐसा दृष्टिकोण रखने वाले विद्वान पुरुष कभी मोह में नहीं पड़ते ॥6॥
In this context it is said - the world is full of physical and mental sufferings. The pleasures in this world also lead to sorrow in the end. Learned men who have such a view never fall into temptation. ॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥