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mahabharat 12.190.3: कहा गया है कि स्वर्ग प्रकाश से पूर्ण है और नरक अंधकार से पूर्ण है। सत्य और असत्य से युक्त मनुष्य योनि संसार के जीवों को ज्ञान और अज्ञान दोनों के संयोग से प्राप्त होती है।॥3॥   |   mahabharat अध्याय 12.190: सत्यकी महिमा, असत्यके दोष तथा लोक और परलोकके सुख-दु:खका विवेचन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 190: सत्यकी महिमा, असत्यके दोष तथा लोक और परलोकके सुख-दु:खका विवेचन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.190.3 
स्वर्ग: प्रकाश इत्याहुर्नरकं तम एव च।
सत्यानृतं तदुभयं प्राप्यते जगतीचरै:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
कहा गया है कि स्वर्ग प्रकाश से पूर्ण है और नरक अंधकार से पूर्ण है। सत्य और असत्य से युक्त मनुष्य योनि संसार के जीवों को ज्ञान और अज्ञान दोनों के संयोग से प्राप्त होती है।॥3॥
 
It is said that heaven is full of light and hell is full of darkness. The human form which is composed of truth and falsehood is attained by the living beings of the world by the combination of both knowledge and ignorance. ॥3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)