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mahabharat 12.190.16: प्राचीन काल में ब्रह्माजी ने स्त्री-पुरुष रूप धारण करके इस जगत की रचना की थी। यहाँ सभी लोग अपने-अपने कर्मों से आवृत होकर सुख-दुःख भोगते हैं। 16॥   |   mahabharat अध्याय 12.190: सत्यकी महिमा, असत्यके दोष तथा लोक और परलोकके सुख-दु:खका विवेचन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 190: सत्यकी महिमा, असत्यके दोष तथा लोक और परलोकके सुख-दु:खका विवेचन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  12.190.16 
इत्येतल्लोकनिर्माणं ब्रह्मणा विहितं पुरा।
प्रजा: समनुवर्तन्ते स्वै: स्वै: कर्मभिरावृता:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
प्राचीन काल में ब्रह्माजी ने स्त्री-पुरुष रूप धारण करके इस जगत की रचना की थी। यहाँ सभी लोग अपने-अपने कर्मों से आवृत होकर सुख-दुःख भोगते हैं। 16॥
 
In ancient times, Lord Brahma had created this world in the form of man and woman. Here all the people, covered with their own deeds, experience happiness and sorrow. 16॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि भृगुभरद्वाजसंवादे नवत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १९०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें भृगु-भरद्वाजसंवादविषयक एक सौ नब्बेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १९०॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)