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mahabharat 12.190.13: स्वर्ग में अत्यंत सुखद वायु बहती है। सर्वत्र सुखद सुगंध व्याप्त रहती है। वहाँ भूख, प्यास, परिश्रम, बुढ़ापा और पापों का फल कभी नहीं भोगना पड़ता।॥13॥   |   mahabharat अध्याय 12.190: सत्यकी महिमा, असत्यके दोष तथा लोक और परलोकके सुख-दु:खका विवेचन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 190: सत्यकी महिमा, असत्यके दोष तथा लोक और परलोकके सुख-दु:खका विवेचन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.190.13 
सुसुख: पवन: स्वर्गे गन्धश्च सुरभिस्तथा।
क्षुत्पिपासा श्रमो नास्ति न जरा न च पापकम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
स्वर्ग में अत्यंत सुखद वायु बहती है। सर्वत्र सुखद सुगंध व्याप्त रहती है। वहाँ भूख, प्यास, परिश्रम, बुढ़ापा और पापों का फल कभी नहीं भोगना पड़ता।॥13॥
 
A very pleasant breeze blows in heaven. A pleasant fragrance prevails everywhere. One never has to suffer the pain of hunger, thirst, hard work, old age and the consequences of sins there.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)