Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.190.11: भृगु जी बोले - मुनि! अज्ञान असत्य से उत्पन्न होता है, अतः अंधकार से ग्रस्त मनुष्य अधर्म का ही पालन करते हैं, धर्म का पालन नहीं करते। जो लोग क्रोध, लोभ, हिंसा और असत्य आदि से आवृत हैं, वे न इस लोक में सुखी होते हैं, न परलोक में। वे नाना प्रकार के रोगों, व्याधियों और तापों से पीड़ित रहते हैं। वे वध और बंदी आदि के कष्टों से तथा भूख, प्यास और थकान से उत्पन्न कष्टों से भी पीड़ित रहते हैं। इतना ही नहीं, उन्हें आँधी, वर्षा, अत्यधिक गर्मी और अत्यधिक सर्दी से उत्पन्न भयंकर शारीरिक कष्ट भी सहने पड़ते हैं। स्वजनों की मृत्यु, धन का नाश और प्रियजनों से वियोग के कारण होने वाले मानसिक दुःख भी उन्हें सताते रहते हैं। वृद्धावस्था और मृत्यु के कारण होने वाले अन्य अनेक कष्ट भी उन्हें सताते रहते हैं। | mahabharat अध्याय 12.190: सत्यकी महिमा, असत्यके दोष तथा लोक और परलोकके सुख-दु:खका विवेचन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भृगु जी बोले - मुनि! अज्ञान असत्य से उत्पन्न होता है, अतः अंधकार से ग्रस्त मनुष्य अधर्म का ही पालन करते हैं, धर्म का पालन नहीं करते। जो लोग क्रोध, लोभ, हिंसा और असत्य आदि से आवृत हैं, वे न इस लोक में सुखी होते हैं, न परलोक में। वे नाना प्रकार के रोगों, व्याधियों और तापों से पीड़ित रहते हैं। वे वध और बंदी आदि के कष्टों से तथा भूख, प्यास और थकान से उत्पन्न कष्टों से भी पीड़ित रहते हैं। इतना ही नहीं, उन्हें आँधी, वर्षा, अत्यधिक गर्मी और अत्यधिक सर्दी से उत्पन्न भयंकर शारीरिक कष्ट भी सहने पड़ते हैं। स्वजनों की मृत्यु, धन का नाश और प्रियजनों से वियोग के कारण होने वाले मानसिक दुःख भी उन्हें सताते रहते हैं। वृद्धावस्था और मृत्यु के कारण होने वाले अन्य अनेक कष्ट भी उन्हें सताते रहते हैं।
Bhrigu Ji said – Muni! Ignorance is born from untruth; therefore, people suffering from darkness follow unrighteousness only; they do not follow dharma. Those who are covered with anger, greed, violence and untruth etc. are neither happy in this world nor in the next. They keep suffering from various types of diseases, ailments and heat. They also suffer from the sufferings of killing and captivity etc. and from the sufferings caused by hunger, thirst and fatigue. Not only this, they also have to bear terrible physical sufferings caused by storm, rain, extreme heat and extreme cold. Mental sorrows caused by the death of relatives, destruction of wealth and separation from loved ones also keep tormenting them. Many other sufferings also keep tormenting them due to old age and death.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥