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mahabharat 12.19.26: कुन्तीनन्दन! बुद्धिमान् पुरुष तप के द्वारा महान् पद को प्राप्त करता है, ज्ञानयोग के द्वारा परम तत्त्व को प्राप्त करता है और स्वार्थ का त्याग करके सदैव सुख का अनुभव करता है॥26॥   |   mahabharat अध्याय 12.19: युधिष्ठिरद्वारा अपने मतकी यथार्थताका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 19: युधिष्ठिरद्वारा अपने मतकी यथार्थताका प्रतिपादन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  12.19.26 
तपसा महदाप्नोति बुद्धॺा वै विन्दते महत्।
त्यागेन सुखमाप्नोति सदा कौन्तेय तत्त्ववित्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीनन्दन! बुद्धिमान् पुरुष तप के द्वारा महान् पद को प्राप्त करता है, ज्ञानयोग के द्वारा परम तत्त्व को प्राप्त करता है और स्वार्थ का त्याग करके सदैव सुख का अनुभव करता है॥26॥
 
Kuntinandan! A wise man attains a great position through penance, attains the supreme essence through the yoga of knowledge and by renunciation of selfishness, he always experiences happiness. 26॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि युधिष्ठिरवाक्ये एकोनविंशोऽध्याय:॥ १९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें युधिष्ठिरका वाक्यविषयक उन्नीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १९॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)