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mahabharat 12.19.11: इस संसार में अनेक धार्मिक लोग तप और स्वाध्याय में लगे हुए देखे जाते हैं और ऋषिगण तो तपस्वी ही होते हैं। वे सभी अनन्त लोकों को प्राप्त होते हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.19: युधिष्ठिरद्वारा अपने मतकी यथार्थताका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.19.11 
तप:स्वाध्यायशीला हि दृश्यन्ते धार्मिका जना:।
ऋषयस्तपसा युक्ता येषां लोका: सनातना:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
इस संसार में अनेक धार्मिक लोग तप और स्वाध्याय में लगे हुए देखे जाते हैं और ऋषिगण तो तपस्वी ही होते हैं। वे सभी अनन्त लोकों को प्राप्त होते हैं।
 
In this world, many religious people are seen engaged in penance and self-study and sages are certainly ascetics. All of them attain eternal worlds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)