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mahabharat 12.19.1: युधिष्ठिर बोले - "महाराज! मैं धर्म और ब्रह्म की व्याख्या करने वाले दोनों शास्त्रों को जानता हूँ। वेदों में दोनों प्रकार की बातें पाई जाती हैं - 'कर्तव्य करो और कर्तव्य छोड़ दो' - मैं उन दोनों को जानता हूँ॥ 1॥   |   mahabharat अध्याय 12.19: युधिष्ठिरद्वारा अपने मतकी यथार्थताका प्रतिपादन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 19: युधिष्ठिरद्वारा अपने मतकी यथार्थताका प्रतिपादन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.19.1 
युधिष्ठिर उवाच
वेदाहं तात शास्त्राणि अपराणि पराणि च।
उभयं वेदवचनं कुरु कर्म त्यजेति च॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - "महाराज! मैं धर्म और ब्रह्म की व्याख्या करने वाले दोनों शास्त्रों को जानता हूँ। वेदों में दोनों प्रकार की बातें पाई जाती हैं - 'कर्तव्य करो और कर्तव्य छोड़ दो' - मैं उन दोनों को जानता हूँ॥ 1॥
 
Yudhishthira said, "Sir, I know both the scriptures that explain Dharma and Brahman. Both types of sayings are found in the Vedas - 'do your duty and leave your duty' - I know both of them.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)