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mahabharat 12.189.9: लोभ और क्रोध पर हर हाल में विजय प्राप्त करनी चाहिए। यही शुद्धतम ज्ञान है और यही आत्म-संयम है।   |   mahabharat अध्याय 12.189: चारों वर्णोंके अलग-अलग कर्मोंका और सदाचारका वर्णन तथा वैराग्यसे परब्रह्मकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.189.9 
सर्वोपायैस्तु लोभस्य क्रोधस्य च विनिग्रह:।
एतत् पवित्रं ज्ञानानां तथा चैवात्मसंयम:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
लोभ और क्रोध पर हर हाल में विजय प्राप्त करनी चाहिए। यही शुद्धतम ज्ञान है और यही आत्म-संयम है।
 
Greed and anger must be conquered by all means. This is the purest knowledge and this is self-control.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)