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mahabharat 12.189.8: यदि सत्य आदि ऊपर बताये गये सात गुण शूद्र में पाये जाते हैं और ब्राह्मण में नहीं पाये जाते, तो वह शूद्र, शूद्र नहीं है और वह ब्राह्मण, ब्राह्मण नहीं है। 8.   |   mahabharat अध्याय 12.189: चारों वर्णोंके अलग-अलग कर्मोंका और सदाचारका वर्णन तथा वैराग्यसे परब्रह्मकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.189.8 
शूद्रे चैतद्भवेल्लक्ष्यं द्विजे तच्च न विद्यते।
न वै शूद्रो भवेच्छूद्रो ब्राह्मणो न च ब्राह्मण:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
यदि सत्य आदि ऊपर बताये गये सात गुण शूद्र में पाये जाते हैं और ब्राह्मण में नहीं पाये जाते, तो वह शूद्र, शूद्र नहीं है और वह ब्राह्मण, ब्राह्मण नहीं है। 8.
 
If the seven qualities mentioned above like truth etc. are found in a Shudra and are not found in a Brahmin, then that Shudra is not a Shudra and that Brahmin is not a Brahmin. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)