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सर्वभक्षरतिर्नित्यं सर्वकर्मकरोऽशुचि:।
त्यक्तवेदस्त्वनाचार: स वै शूद्र इति स्मृत:॥ ७॥
अनुवाद
परन्तु जो वेद और सदाचार को त्यागकर सब प्रकार का भोजन करने और सब प्रकार के काम करने में रुचि रखता है, तथा साथ ही भीतर और बाहर से अशुद्ध रहता है, वह शूद्र कहलाता है।
But he who abandons the Vedas and good conduct and is always fond of eating everything and doing all kinds of work, and at the same time remains impure inside and out, is called a Shudra. 7.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥