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mahabharat 12.189.18: सदैव स्वच्छता और सदाचार का पालन करना चाहिए तथा सभी जीवों के प्रति दयाभाव रखना चाहिए; यही ब्राह्मण का मुख्य लक्षण है।   |   mahabharat अध्याय 12.189: चारों वर्णोंके अलग-अलग कर्मोंका और सदाचारका वर्णन तथा वैराग्यसे परब्रह्मकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 189: चारों वर्णोंके अलग-अलग कर्मोंका और सदाचारका वर्णन तथा वैराग्यसे परब्रह्मकी प्राप्ति  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  12.189.18 
शौचेन सततं युक्त: सदाचारसमन्वित:।
सानुक्रोशश्च भूतेषु तद् द्विजातिषु लक्षणम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
सदैव स्वच्छता और सदाचार का पालन करना चाहिए तथा सभी जीवों के प्रति दयाभाव रखना चाहिए; यही ब्राह्मण का मुख्य लक्षण है।
 
One should always follow cleanliness and good conduct and be kind to all living beings; this is the main characteristic of a Brahmin. 18.
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि भृगुभरद्वाजसंवादे वर्णस्वरूपकथने एकोननवत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १८९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें भृगु-भरद्वाजसंवादके प्रसंगमें वर्णोंके स्वरूपका कथनविषयक एक सौ नवासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १८९॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)