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mahabharat 12.189.12-13: किसी भी प्राणी की हिंसा न करे, सबके साथ मित्रता का व्यवहार करे। स्त्री-पुत्र आदि की ममता और आसक्ति को त्यागकर बुद्धि के द्वारा इन्द्रियों को वश में करे और उस गति को प्राप्त करे जो इस लोक और परलोक में भी निर्भय और शोकरहित हो। 12-13॥   |   mahabharat अध्याय 12.189: चारों वर्णोंके अलग-अलग कर्मोंका और सदाचारका वर्णन तथा वैराग्यसे परब्रह्मकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 189: चारों वर्णोंके अलग-अलग कर्मोंका और सदाचारका वर्णन तथा वैराग्यसे परब्रह्मकी प्राप्ति  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  12.189.12-13 
अहिंस्र: सर्वभूतानां मैत्रायणगतश्चरेत्॥ १२॥
परिग्रहान् परित्यज्य भवेद् बुद्धॺा जितेन्द्रिय:।
अशोकं स्थानमातिष्ठेदिह चामुत्र चाभयम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
किसी भी प्राणी की हिंसा न करे, सबके साथ मित्रता का व्यवहार करे। स्त्री-पुत्र आदि की ममता और आसक्ति को त्यागकर बुद्धि के द्वारा इन्द्रियों को वश में करे और उस गति को प्राप्त करे जो इस लोक और परलोक में भी निर्भय और शोकरहित हो। 12-13॥
 
Do not do violence to any living being, behave friendly with everyone. Abandoning the love and attachment of wife and son etc., one should control the senses through the intellect and attain that state which is fearless and without sorrow in this world as well as in the next world. 12-13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)