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mahabharat 12.189.1: भारद्वाज ने पूछा - वक्ताओं में श्रेष्ठ ब्रह्मर्षे! द्विजोत्तम! अब मुझे बताइए कि किस कर्म से मनुष्य ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र बनता है?॥1॥   |   mahabharat अध्याय 12.189: चारों वर्णोंके अलग-अलग कर्मोंका और सदाचारका वर्णन तथा वैराग्यसे परब्रह्मकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.189.1 
भरद्वाज उवाच
ब्राह्मण: केन भवति क्षत्रियो वा द्विजोत्तम।
वैश्य: शूद्रश्च विप्रर्षे तद् ब्रूहि वदतां वर॥ १॥
 
 
अनुवाद
भारद्वाज ने पूछा - वक्ताओं में श्रेष्ठ ब्रह्मर्षे! द्विजोत्तम! अब मुझे बताइए कि किस कर्म से मनुष्य ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य या शूद्र बनता है?॥1॥
 
Bharadwaja asked – Brahmarshe, the best among speakers! Dwijottam! Now tell me by which action a man becomes a Brahmin, Kshatriya, Vaishya or Shudra? 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)