श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 187: जीवकी सत्ता तथा नित्यताको युक्तियोंसे सिद्ध करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.187.6 
तथा शरीरसंत्यागे जीवो ह्याकाशवत् स्थित:।
न गृह्यते तु सूक्ष्मत्वाद् यथा ज्योतिर्न संशय:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार शरीर छोड़ने के बाद भी आत्मा आकाश के समान विद्यमान रहती है। अति सूक्ष्म होने के कारण बुझी हुई अग्नि के समान उसका अनुभव नहीं किया जा सकता, परन्तु वह अवश्य रहती है; इसमें कोई संदेह नहीं है।॥6॥
 
In the same way, after leaving the body, the soul remains like the sky. Being very subtle, it cannot be felt like an extinguished fire, but it definitely remains; there is no doubt about it. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)