श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 187: जीवकी सत्ता तथा नित्यताको युक्तियोंसे सिद्ध करना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  12.187.31 
मानसोऽग्नि: शरीरेषु जीव इत्यभिधीयते।
सृष्टि: प्रजापतेरेषा भूताध्यात्मविनिश्चये॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
समस्त शरीरों में मन के भीतर स्थित ज्योतिस्वरूप चेतना को प्रजापति कहते हैं, जो समस्त प्राणियों का स्वरूप है। उसी प्रजापति से यह सृष्टि उत्पन्न हुई है। ऐसा अध्यात्म तत्त्व के निश्चय से कहा गया है। 31॥
 
The consciousness in the form of light, which resides within the mind in all the bodies, is called Prajapati, the embodiment of all living beings. This creation has arisen from the same Prajapati. This has been said with determination of spiritual principle. 31॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि मोक्षधर्मपर्वणि भृगुभरद्वाजसंवादे जीवस्वरूपनिरूपणे सप्ताशीत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १८७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत मोक्षधर्मपर्वमें भृगु-भरद्वाजके संवादके प्रसंगमें जीवके स्वरूपका निरूपणविषयक एक सौ सतासीवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १८७॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)