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mahabharat 12.187.23: जब आत्मा स्वाभाविक गुणों से युक्त होता है, तब उसे क्षेत्रज्ञ कहा जाता है और जब वह उन गुणों से मुक्त हो जाता है, तब उसे परमात्मा कहा जाता है ॥23॥   |   mahabharat अध्याय 12.187: जीवकी सत्ता तथा नित्यताको युक्तियोंसे सिद्ध करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 187: जीवकी सत्ता तथा नित्यताको युक्तियोंसे सिद्ध करना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  12.187.23 
आत्मा क्षेत्रज्ञ इत्युक्त: संयुक्त: प्राकृतैर्गुणै:।
तैरेव तु विनिर्मुक्त: परमात्मेत्युदाहृत:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
जब आत्मा स्वाभाविक गुणों से युक्त होता है, तब उसे क्षेत्रज्ञ कहा जाता है और जब वह उन गुणों से मुक्त हो जाता है, तब उसे परमात्मा कहा जाता है ॥23॥
 
When the soul is endowed with natural qualities, it is called the knower of the field and when it is freed from those qualities, it is called the Supreme Soul. ॥23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)