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mahabharat 12.187.21: जब पाँच भौतिक शरीरों में रूप, स्पर्श और उष्णता का कोई बोध नहीं रहता, उस अवस्था में शरीर की अग्नि शांत हो जाने पर भी आत्मा इस शरीर को छोड़ देने पर भी नष्ट नहीं होती ॥21॥   |   mahabharat अध्याय 12.187: जीवकी सत्ता तथा नित्यताको युक्तियोंसे सिद्ध करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 187: जीवकी सत्ता तथा नित्यताको युक्तियोंसे सिद्ध करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  12.187.21 
यदा न रूपं न स्पर्शो नोष्मभावश्च पञ्चके।
तदा शान्ते शरीराग्नौ देहत्यागे न नश्यति॥ २१॥
 
 
अनुवाद
जब पाँच भौतिक शरीरों में रूप, स्पर्श और उष्णता का कोई बोध नहीं रहता, उस अवस्था में शरीर की अग्नि शांत हो जाने पर भी आत्मा इस शरीर को छोड़ देने पर भी नष्ट नहीं होती ॥21॥
 
When there is no sense of form, touch and heat in the five physical bodies, in that state the soul does not get destroyed even after leaving this body when the fire in the body subsides. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)