न पश्यति न चाघ्राति न शृणोति न भाषते।
न च स्पर्शरसौ वेत्ति निद्रावशगत: पुन:॥ १७॥
अनुवाद
निद्रा के प्रभाव में आया हुआ मनुष्य (सब इन्द्रियों के होते हुए भी) न तो देखता है, न सूंघता है, न सुनता है, न बोलता है और न स्पर्श या स्वाद का अनुभव करता है ॥17॥
A man under the influence of sleep (despite having all the senses) neither sees nor smells nor hears nor speaks nor experiences the sense of touch or taste. ॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥