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mahabharat 12.187.14: यदि पाँच तत्वों से बने इस शरीर को आत्मा रहित मान लिया जाए, तो प्रश्न यह है कि जब शरीर या मन में पीड़ा होती है, तो पीड़ा का अनुभव कौन करता है? ॥14॥   |   mahabharat अध्याय 12.187: जीवकी सत्ता तथा नित्यताको युक्तियोंसे सिद्ध करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 187: जीवकी सत्ता तथा नित्यताको युक्तियोंसे सिद्ध करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.187.14 
यद्यजीवं शरीरं तु पञ्चभूतसमन्वितम्।
शारीरे मानसे दु:खे कस्तां वेदयते रुजम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
यदि पाँच तत्वों से बने इस शरीर को आत्मा रहित मान लिया जाए, तो प्रश्न यह है कि जब शरीर या मन में पीड़ा होती है, तो पीड़ा का अनुभव कौन करता है? ॥14॥
 
If this body made up of five elements is considered to be without soul, then the question is that when there is pain in the body or mind, who experiences the pain? ॥14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)